Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.95.51: अपने सेवकों की यह बात सुनकर राजा वृषदर्भि अत्यंत क्रोधित हुए और सप्तर्षियों से अपने अपमान का बदला लेने का निश्चय किया और राजधानी लौट आए। | mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्युक्त: स तु भृत्यैस्तैर्वृषादर्भिश्चुकोप ह।
तेषां वै प्रतिकर्तुं च सर्वेषामगमद् गृहम्॥ ५१॥
अनुवाद
अपने सेवकों की यह बात सुनकर राजा वृषदर्भि अत्यंत क्रोधित हुए और सप्तर्षियों से अपने अपमान का बदला लेने का निश्चय किया और राजधानी लौट आए।
King Vrishadharbhi became very angry at hearing his servants say this. He decided to take revenge on the seven sages for his insult and returned to the capital.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥