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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  13.95.50 
मन्त्रिण ऊचु:
उपधिं शंकमानास्ते हित्वा तानि फलानि वै।
ततोऽन्येनैव गच्छन्ति विदितं तेऽस्तु पार्थिव॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
तब मंत्रियों ने शैव्या के पास जाकर कहा - महाराज! आपको मालूम होना चाहिए कि उन फलों को देखकर ऋषियों को संदेह हुआ कि उनके साथ छल किया जा रहा है। इसीलिए वे फलों को त्यागकर दूसरे मार्ग से चले गए।
 
Then the ministers went to Shaivya and said - Maharaj! You should know that on seeing those fruits, the sages suspected that they were being deceived. That is why they abandoned the fruits and went by another route. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)