Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.95.46: गंडा बोला, "जब मेरे स्वामी अत्यंत शक्तिशाली होते हुए भी इस भयंकर दान से इतने भयभीत हैं, तो मेरी क्या ताकत? मैं एक दुर्बल प्राणी की तरह इससे बहुत भयभीत हो रहा हूँ।" | mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गंडा बोला, "जब मेरे स्वामी अत्यंत शक्तिशाली होते हुए भी इस भयंकर दान से इतने भयभीत हैं, तो मेरी क्या ताकत? मैं एक दुर्बल प्राणी की तरह इससे बहुत भयभीत हो रहा हूँ।"
Ganda said, "When my masters, despite being very powerful, are so afraid of this terrible gift, then what is my strength? I am feeling very afraid of this like a weak creature."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥