Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.95.44: जमदग्नि ने कहा, "दान न लेने से ही ब्राह्मण अपनी तपस्या की रक्षा कर सकता है। तपस्या ही ब्राह्मण का धन है। जो सांसारिक धन का लोभी है, उसका तपस्या रूपी धन नष्ट हो जाता है।" 44. | mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जमदग्नि ने कहा, "दान न लेने से ही ब्राह्मण अपनी तपस्या की रक्षा कर सकता है। तपस्या ही ब्राह्मण का धन है। जो सांसारिक धन का लोभी है, उसका तपस्या रूपी धन नष्ट हो जाता है।" 44.
Jamadagni said, "Only by not accepting gifts can a Brahmin preserve his austerity. Penance itself is the wealth of a Brahmin. One who is greedy for worldly wealth, his wealth in the form of austerity is destroyed." 44.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥