Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.95.34: हे राजन! इस दान से आप सदैव सुरक्षित रहेंगे और यह सारा दान उन्हें दे दीजिए जो आपसे ये वस्तुएं लेना चाहते हैं। ऐसा कहकर वह दूसरे मार्ग से चला गया। | mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुशलं सह दानेन राजन्नस्तु सदा तव।
अर्थिभ्यो दीयतां सर्वमित्युक्त्वान्येन ते ययु:॥ ३४॥
अनुवाद
हे राजन! इस दान से आप सदैव सुरक्षित रहेंगे और यह सारा दान उन्हें दे दीजिए जो आपसे ये वस्तुएं लेना चाहते हैं। ऐसा कहकर वह दूसरे मार्ग से चला गया।
O King! With this donation, you will always remain safe and you should give all this donation to those who want to take these things from you. Saying this, he went by another route. 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥