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mahabharat 13.95.28: क्योंकि जो ब्राह्मण मुझसे भिक्षा मांगता है, वह मुझे बहुत प्रिय है। मैं तुममें से प्रत्येक को एक-एक हजार खच्चर देता हूँ और प्रत्येक को बैलों सहित श्वेत रोएँदार, तीव्रगामी और गर्भवती गायें देने को तैयार हूँ।   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.95.28 
प्रियो हि मे ब्राह्मणो याचमानो
दद्यामहं वोऽश्वतरीसहस्रम्।
एकैकश: सवृषा: सम्प्रसूता:
सर्वेषां वै शीघ्रगा: श्वेतरोमा:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि जो ब्राह्मण मुझसे भिक्षा मांगता है, वह मुझे बहुत प्रिय है। मैं तुममें से प्रत्येक को एक-एक हजार खच्चर देता हूँ और प्रत्येक को बैलों सहित श्वेत रोएँदार, तीव्रगामी और गर्भवती गायें देने को तैयार हूँ।
 
Because the Brahmin who begs for me is very dear to me. I give each of you a thousand mules and I am ready to give everyone white-furred, fast-moving and pregnant cows along with their bulls.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)