Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.95.20: भारत! इस संदर्भ में राजा वृषदर्भि और सप्तर्षियों के बीच संवाद रूपी एक प्राचीन कथा का उदाहरण दिया जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.95.20 
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
वृषादर्भेश्च संवादं सप्तर्षीणां च भारत॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भारत! इस संदर्भ में राजा वृषदर्भि और सप्तर्षियों के बीच संवाद रूपी एक प्राचीन कथा का उदाहरण दिया जाता है।
 
Bharat! In this context an example of an ancient story in the form of a dialogue between King Vrishadarbhi and the Saptarishis is given. 20.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)