Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.95.126: जिसने मृणाल चुराई है, वह वर्षा ऋतु में परदेश जाने, ब्राह्मण होकर भी वेतन पर काम करने, राजा के पुरोहित से तथा यज्ञ करने के लिए अधिकृत न किए गए व्यक्ति से यज्ञ करवाने के पाप का भागी होगा ॥126॥ | mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिसने मृणाल चुराई है, वह वर्षा ऋतु में परदेश जाने, ब्राह्मण होकर भी वेतन पर काम करने, राजा के पुरोहित से तथा यज्ञ करने के लिए अधिकृत न किए गए व्यक्ति से यज्ञ करवाने के पाप का भागी होगा ॥126॥
He who has stolen the Mrinal will be guilty of the sin of travelling to a foreign country during the rainy season, of working for a salary despite being a Brahmin, of getting a sacrifice performed by the king's priest and by a person who is not authorized to perform the sacrifice. ॥126॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥