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mahabharat 13.95.122: गौतम बोले - जिसने कमल चुराया है, वह वेदों को पढ़कर त्याग देने, तीनों अग्नियों को त्याग देने और सोमरस को बेचने के पाप का भागी होगा ॥122॥   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  13.95.122 
गौतम उवाच
अधीत्य वेदांस्त्यजतु त्रीनग्नीनपविध्यतु।
विक्रीणातु तथा सोमं बिसस्तैन्यं करोति य:॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
गौतम बोले - जिसने कमल चुराया है, वह वेदों को पढ़कर त्याग देने, तीनों अग्नियों को त्याग देने और सोमरस को बेचने के पाप का भागी होगा ॥122॥
 
Gautama said: He who stole the lotus will be guilty of the sin of abandoning the Vedas after reading them, of abandoning the three fires and of selling the Soma juice.॥ 122॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)