Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.95.11: जो पुरुष अपनी पत्नी के साथ केवल मासिक धर्म के समय ही समागम करता है, वह ब्रह्मचारी माना जाता है। जो पुरुष सदैव दान देता है, वह सत्यवादी माना जाता है ॥11॥ | mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भार्यां गच्छन् ब्रह्मचारी ऋतौ भवति चैव ह।
ऋतवादी सदा च स्याद् दानशीलस्तु मानव:॥ ११॥
अनुवाद
जो पुरुष अपनी पत्नी के साथ केवल मासिक धर्म के समय ही समागम करता है, वह ब्रह्मचारी माना जाता है। जो पुरुष सदैव दान देता है, वह सत्यवादी माना जाता है ॥11॥
He who has sexual intercourse with his wife only during her menstrual period is considered a celibate. A man who always gives charity is considered a truthful person. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥