Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.95.109: थोड़ी देर बाद जब महापुरुष जल से बाहर आये तो उन्हें वे कमल पुष्प दिखाई नहीं दिये जिन्हें उन्होंने अलग रख दिया था।   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  13.95.109 
अथोत्थाय जलात् तस्मात् सर्वे ते समुपागमन्।
नापश्यंश्चापि ते तानि बिसानि पुरुषर्षभा:॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
थोड़ी देर बाद जब महापुरुष जल से बाहर आये तो उन्हें वे कमल पुष्प दिखाई नहीं दिये जिन्हें उन्होंने अलग रख दिया था।
 
When the great man came out of the water a little while later, he could not see the lotus flowers that he had kept aside. 109.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)