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mahabharat 13.95.108: फिर उसने बड़े यत्न से भिन्न-भिन्न बोझ बाँधे और उन्हें किनारे पर रखकर सरोवर का जल अर्पण करने लगा॥108॥   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  13.95.108 
श्रमेण महता कृत्वा ते बिसानि कलापश:।
तीरे निक्षिप्य पद्मिन्यास्तर्पणं चक्रुरम्भसा॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने बड़े यत्न से भिन्न-भिन्न बोझ बाँधे और उन्हें किनारे पर रखकर सरोवर का जल अर्पण करने लगा॥108॥
 
Then with great effort he tied up the different loads. After this he kept them on the bank and started offering water from the lake.॥ 108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)