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mahabharat 13.95.10: भीष्म ने कहा- युधिष्ठिर! जो मनुष्य केवल प्रातः और सायं ही भोजन करता है, बीच में कुछ नहीं खाता, उसे व्रती समझना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.95.10 
भीष्म उवाच
अन्तरा सायमाशं च प्रातराशं च यो नर:।
सदोपवासी भवति यो न भुंक्तेऽन्तरा पुन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भीष्म ने कहा- युधिष्ठिर! जो मनुष्य केवल प्रातः और सायं ही भोजन करता है, बीच में कुछ नहीं खाता, उसे व्रती समझना चाहिए।
 
Bhishma said-Yudhishthira! A person who eats only in the morning and evening and does not eat anything in between should be considered a fasting person.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)