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mahabharat 13.93.6: उन्होंने पूरे एक हजार वर्षों तक कठोर तपस्या की और अंततः काल के नियम के आगे समर्पण करते हुए अपने प्राण त्याग दिए।   |   mahabharat अध्याय 13.93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.93.6 
पूर्णे वर्षसहस्रान्ते स कृत्वा दुष्करं तप:।
कालधर्मपरीतात्मा निधनं समुपागत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने पूरे एक हजार वर्षों तक कठोर तपस्या की और अंततः काल के नियम के आगे समर्पण करते हुए अपने प्राण त्याग दिए।
 
He performed severe penance for a full thousand years and finally gave up his life, surrendering to the law of time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)