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mahabharat 13.93.5: दत्तात्रेय के पुत्र निमि थे, जो महान तपस्वी थे। निमिके के भी एक पुत्र थे, जिनका नाम श्रीमान् था। वे अत्यंत तेजस्वी थे। 5॥   |   mahabharat अध्याय 13.93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.93.5 
दत्तात्रेयस्य पुत्रोऽभून्निमिर्नाम तपोधन:।
निमेश्चाप्यभवत् पुत्र: श्रीमान्नाम श्रिया वृत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
दत्तात्रेय के पुत्र निमि थे, जो महान तपस्वी थे। निमिके के भी एक पुत्र थे, जिनका नाम श्रीमान् था। वे अत्यंत तेजस्वी थे। 5॥
 
Dattatreya had a son, Nimi, who was a great ascetic. Nimike also had a son, whose name was Shriman. He was very radiant. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)