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mahabharat 13.93.43-44: ‘जब पिण्डदान का समय आए, तब चाण्डाल और शुपाचों को उस स्थान से हटा देना चाहिए। भगवा वस्त्रधारी संन्यासी, कोढ़ी, पतित, ब्रह्महत्यारा, वर्णभ्रष्ट ब्राह्मण और धर्मच्युत बंधु-बांधवों को भी श्राद्ध का समय आने पर विद्वानों द्वारा वहाँ से हटा देना चाहिए।’॥43-44॥   |   mahabharat अध्याय 13.93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 43-44
 
 
श्लोक  13.93.43-44 
चाण्डालश्वपचौ वर्ज्यौ निवापे समुपस्थिते।
काषायवासा: कुष्ठी वा पतितो ब्रह्महापि वा॥ ४३॥
संकीर्णयोनिर्विप्रश्च सम्बन्धी पतितश्च य:।
वर्जनीया बुधैरेते निवापे समुपस्थिते॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
‘जब पिण्डदान का समय आए, तब चाण्डाल और शुपाचों को उस स्थान से हटा देना चाहिए। भगवा वस्त्रधारी संन्यासी, कोढ़ी, पतित, ब्रह्महत्यारा, वर्णभ्रष्ट ब्राह्मण और धर्मच्युत बंधु-बांधवों को भी श्राद्ध का समय आने पर विद्वानों द्वारा वहाँ से हटा देना चाहिए।’॥43-44॥
 
‘When the time for Pind Daan arrives, Chandalas and Shupachas should be removed from that place. A sanyasi wearing saffron clothes, a leper, a fallen person, a brahmin-killer, a mixed caste Brahmin and a relative who has deviated from his religion should also be removed from there by learned people when the time for Shraddha arrives.’॥ 43-44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)