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mahabharat 13.93.4: कुरुनन्दन! महाराज! प्राचीन काल में ब्रह्माजी से महर्षि अत्रिकि उत्पन्न हुए। वे एक महान ऋषि थे। उनके वंश में दत्तात्रेयजी उत्पन्न हुए। 4॥   |   mahabharat अध्याय 13.93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.93.4 
स्वायम्भुवोऽत्रि: कौरव्य परमर्षि: प्रतापवान्।
तस्य वंशे महाराज दत्तात्रेय इति स्मृत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! महाराज! प्राचीन काल में ब्रह्माजी से महर्षि अत्रिकि उत्पन्न हुए। वे एक महान ऋषि थे। उनके वंश में दत्तात्रेयजी उत्पन्न हुए। 4॥
 
Kurunandan! Maharaj! In ancient times, Maharishi Atriki was born from Brahmaji. He was a great sage. Dattatreyaji was born in his lineage. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)