Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.93.14-15: तत्पश्चात् उन्होंने भोजन करने वाले ब्राह्मणों के पैरों के नीचे चटाई बिछाकर कुशा बिछा दी और दाहिनी ओर (अपने सामने भी) कुशा रखकर पवित्र और सावधान होकर अपने पुत्र श्रीमान् का नाम और गोत्र बोलते हुए कुशा पर पिण्डदान किया॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 13.93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दक्षिणाग्रास्ततो दर्भा विष्टरेषु निवेशिता:।
पादयोश्चैव विप्राणां ये त्वन्नमुपभुञ्जते॥ १४॥
कृत्वा च दक्षिणाग्रान् वै दर्भान् स प्रयत: शुचि:।
प्रददौ श्रीमत: पिण्डान् नामगोत्रमुदाहरन्॥ १५॥
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने भोजन करने वाले ब्राह्मणों के पैरों के नीचे चटाई बिछाकर कुशा बिछा दी और दाहिनी ओर (अपने सामने भी) कुशा रखकर पवित्र और सावधान होकर अपने पुत्र श्रीमान् का नाम और गोत्र बोलते हुए कुशा पर पिण्डदान किया॥14-15॥
Thereafter he spread kusha grass on the mats under the feet of the brahmins who were having their meal and keeping kusha grass on the right side (in front of himself also), being pure and careful he performed Pind-daan on the kusha grass while uttering the name and gotra of his son Shriman.॥ 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥