Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.9.28: भरतश्रेष्ठ! ब्राह्मण महान तीर्थयात्री कहे जाते हैं; इसलिए यदि वे किसी समय घर पर आएँ, तो उनका स्वागत किए बिना उन्हें जाने नहीं देना चाहिए॥28॥ | mahabharat अध्याय 13.9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महद्धि भरतश्रेष्ठ ब्राह्मणस्तीर्थमुच्यते।
वेलायां न तु कस्यांचिद् गच्छेद् विप्रोह्यपूजित:॥ २८॥
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! ब्राह्मण महान तीर्थयात्री कहे जाते हैं; इसलिए यदि वे किसी समय घर पर आएँ, तो उनका स्वागत किए बिना उन्हें जाने नहीं देना चाहिए॥28॥
Bharatshrestha! Brahmins are called great pilgrims; Therefore, if they come to the house at any time, they should not be allowed to leave without being welcomed. 28॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि शृगालवानरसंवादे नवमोऽध्याय:॥ ९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दान - धर्मपर्वमें सियार और वानरका संवादविषयक नवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ९ ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥