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mahabharat 13.9.27: इस लोक में ब्राह्मणों को दान देने से देवता और पितर तृप्त होते हैं; इसलिए विद्वान् पुरुष को ब्राह्मण को दान अवश्य देना चाहिए ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 13.9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.9.27 
इतो दत्तेन जीवन्ति देवता: पितरस्तथा।
तस्माद् दानानि देयानि ब्राह्मणेभ्यो विजानता॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इस लोक में ब्राह्मणों को दान देने से देवता और पितर तृप्त होते हैं; इसलिए विद्वान् पुरुष को ब्राह्मण को दान अवश्य देना चाहिए ॥27॥
 
In this world, by giving donations to Brahmins, the gods and ancestors are satisfied; Therefore, a learned man must donate to a Brahmin. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)