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mahabharat 13.9.25: हे भरतश्रेष्ठ युधिष्ठिर! अतः जो उत्तम योनि में जन्म लेना चाहता है, उसे ब्राह्मण को वचनबद्ध वस्तु अवश्य देनी चाहिए। 25॥   |   mahabharat अध्याय 13.9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.9.25 
तस्माद् दातव्यमेवेह प्रतिश्रुत्य युधिष्ठिर।
यदीच्छेच्छोभनां जातिं प्राप्तुं भरतसत्तम॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ युधिष्ठिर! अतः जो उत्तम योनि में जन्म लेना चाहता है, उसे ब्राह्मण को वचनबद्ध वस्तु अवश्य देनी चाहिए। 25॥
 
Yudhishthira, the best of Bharat! Therefore, one who wants to be born in a good life, must give the promised thing to a Brahmin. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)