श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 89: विविध तिथियोंमें श्राद्ध करनेका फल  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.89.3 
भीष्म उवाच
शृणुष्वावहितो राजन् श्राद्धकर्मविधिं शुभम्।
धन्यं यशस्यं पुत्रीयं पितृयज्ञं परंतप॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - शत्रुओं को पीड़ा देने वाले राजन! आप श्राद्ध की शुभ विधि ध्यानपूर्वक सुनें। इससे धन, यश और पुत्र की प्राप्ति होगी। इसे पितृयज्ञ कहते हैं। 3॥
 
Bhishmaji said – King who torments the enemies! You listen carefully to the auspicious method of performing Shraddha. This will bring wealth, fame and a son. This is called Pitriyagya. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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