श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 89: विविध तिथियोंमें श्राद्ध करनेका फल  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.89.19 
यथा चैवापर: पक्ष: पूर्वपक्षाद् विशिष्यते।
तथा श्राद्धस्य पूर्वाह्णादपराह्णो विशिष्यते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जैसे श्राद्ध करने के लिए पूर्व (शुक्ल) पक्ष पूर्व (कृष्ण) पक्ष से श्रेष्ठ माना जाता है, वैसे ही प्रातःकाल से मध्याह्न काल श्रेष्ठ माना जाता है॥19॥
 
Just as the previous (Shukla) fortnight is considered better than the previous (Krishna) fortnight for performing Shraddha, similarly the afternoon is considered better than the morning.॥ 19॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि श्राद्धकल्पे सप्ताशीतितमोऽध्याय:॥ ८७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें श्राद्धकल्पविषयक सतासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८७॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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