श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 89: विविध तिथियोंमें श्राद्ध करनेका फल  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.89.15 
द्वादश्यामीहमानस्य नित्यमेव प्रदृश्यते।
रजतं बहुवित्तं च सुवर्णं च मनोरमम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य द्वादशी को श्राद्ध का प्रयत्न करता है, उसे सदैव सुन्दर सोना, चाँदी और बहुत-सा धन प्राप्त होता हुआ देखा जाता है ॥15॥
 
A person who makes efforts for Shraddha on Dwadashi is always seen getting beautiful gold, silver and a lot of wealth. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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