श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 89: विविध तिथियोंमें श्राद्ध करनेका फल  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.89.12 
कृषिभागी भवेच्छ्राद्धं कुर्वाण: सप्तमीं नृप।
अष्टम्यां तु प्रकुर्वाणो वाणिज्ये लाभमाप्नुयात्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजन! जो व्यक्ति सप्तमी को श्राद्ध करता है, उसे कृषि में लाभ होता है और जो व्यक्ति अष्टमी को श्राद्ध करता है, उसे व्यापार में लाभ होता है। 12॥
 
Rajan! A person who performs Shraddha on Saptami gets profit in agriculture and a person who performs Shraddha on Ashtami gets profit in business. 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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