श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  13.87.95 
एष ब्रह्मा शिवो रुद्रो वरुणोऽग्नि: प्रजापति:।
कीर्त्यते भगवान‍् देव: सर्वभूतपति: शिव:॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
ये ही परमेश्वर महादेव ब्रह्मा, शिव, रुद्र, वरुण, अग्नि, प्रजापति और कल्याणमय शम्भु आदि नामों से पुकारे जाते हैं॥95॥
 
This same Lord, the Supreme Lord Mahadev, is called by names like Brahma, Shiva, Rudra, Varun, Agni, Prajapati and Kalyanmay Shambhu etc. 95॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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