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mahabharat 13.87.94: ये भगवान शिव स्वर्ग, आकाश, पृथ्वी, समस्त शून्यलोकों के स्वामी, समस्त विद्याओं के स्वामी और तेजस्वी अग्निस्वरूप हैं ॥94॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  13.87.94 
द्यौर्नभ: पृथिवी खं च तथा चैवैष भूपति:।
सर्वविद्येश्वर: श्रीमानेष चापि विभावसु:॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
ये भगवान शिव स्वर्ग, आकाश, पृथ्वी, समस्त शून्यलोकों के स्वामी, समस्त विद्याओं के स्वामी और तेजस्वी अग्निस्वरूप हैं ॥94॥
 
This Lord Shiva is the heaven, the sky, the earth, all the void regions, the king, the lord of all the knowledge and the form of brilliant fire. 94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)