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mahabharat 13.87.92: वेद, उपनिषद्, विद्या और सावित्री देवी भी वहाँ आ गईं। भगवान शिव ने भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों को धारण कर लिया था॥92॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  13.87.92 
वेदाश्च सोपनिषदो विद्या सावित्र्यथापि च।
भूतं भव्यं भविष्यं च दधार भगवान‍् शिव:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
वेद, उपनिषद्, विद्या और सावित्री देवी भी वहाँ आ गईं। भगवान शिव ने भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों को धारण कर लिया था॥92॥
 
Vedas, Upanishads, Vidya and Savitri Devi also came there. Lord Shiva had taken on the three time frames – past, present and future.॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)