श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.87.7 
देवाश्च शप्ता रुद्राण्या प्रजोच्छेदे पुराकृते।
न भविष्यति वोऽपत्यमिति सर्वे जगत‍्पते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे जगत के स्वामी! पूर्वकाल में जब हमने रुद्राणी की संतान का नाश किया था, तब उसने समस्त देवताओं को शाप दिया था कि उनकी कोई संतान नहीं होगी।॥7॥
 
O lord of the world! In the past when we destroyed the progeny of Rudraani, she cursed all the gods that they would not have any children. ॥ 7॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd