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mahabharat 13.87.68: देवताओं और अग्नि के निषेध के बावजूद, नदियों में श्रेष्ठ गंगा ने गर्भ को मेरु पर्वत के शिखर पर छोड़ दिया। 68.   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.87.68 
सा वह्निना वार्यमाणा देवैरपि सरिद्वरा।
समुत्ससर्ज तं गर्भं मेरौ गिरिवरे तदा॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
देवताओं और अग्नि के निषेध के बावजूद, नदियों में श्रेष्ठ गंगा ने गर्भ को मेरु पर्वत के शिखर पर छोड़ दिया। 68.
 
In spite of the prohibition of the Gods and Agni, Ganga, the best of the rivers, left the fetus on the peak of Mount Meru. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)