श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 48-49
 
 
श्लोक  13.87.48-49 
तमूचुर्विबुधा: सर्वे ते चैव परमर्षय:।
त्वां नियोक्ष्यामहे कार्ये तद् भवान् कर्तुमर्हति॥ ४८॥
कृते च तस्मिन् भविता तवापि सुमहान् गुण:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
तब सब देवताओं और ऋषियों ने उससे कहा, 'हम तुम्हें एक कार्य पर नियुक्त करते हैं। तुम उसे करो। उस कार्य को पूरा करने पर तुम्हें महान् लाभ भी होगा।'॥48-49॥
 
Then all the gods and sages said to him, 'We will appoint you to a task. You should do it. On completing that task, you will also get a great benefit.'॥ 48-49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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