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mahabharat 13.87.47: उस समय देवताओंको देखकर अग्निदेव व्याकुल हो गये और उनसे पूछने लगे कि ‘आप सब लोग किस उद्देश्यसे यहाँ आये हैं?’॥47॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  13.87.47 
अथाग्निर्देवता दृष्ट्वा बभूव व्यथितस्तदा।
किमागमनमित्येवं तानपृच्छत पावक:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
उस समय देवताओंको देखकर अग्निदेव व्याकुल हो गये और उनसे पूछने लगे कि ‘आप सब लोग किस उद्देश्यसे यहाँ आये हैं?’॥47॥
 
At that time, seeing the Gods, Agni became distressed and began to ask them, 'For what purpose have you all come here?'॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)