श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.87.40 
शुकेन ख्यापितो विप्र तं देवा: समुपाद्रवन्।
शशाप शुकमग्निस्तु वाग्विहीनो भविष्यसि॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
विप्रवर! उसके बाद तोते ने अग्निदेव का पता बताया। तब देवता शमी वृक्ष की ओर दौड़े। यह देखकर अग्निदेव ने तोते को शाप दिया - 'तू वाणीहीन हो जाएगा।'
 
Vipravara! After that the parrot told the address of Agni. Then the gods ran towards the Shami tree. Seeing this, Agni cursed the parrot - 'You will become devoid of speech'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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