Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.87.36: ऐसा कहकर अग्निदेव, हाथी की सूचना पाकर, अश्वत्थ से निकलकर शमी में प्रवेश कर गए और वहाँ ठीक से सोना चाहते थे।   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.87.36 
इत्युक्त्वा नि:सृतोऽश्वत्थादग्निर्वारणसूचित:।
प्रविवेश शमीगर्भमथ वह्नि: सुषुप्सया॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर अग्निदेव, हाथी की सूचना पाकर, अश्वत्थ से निकलकर शमी में प्रवेश कर गए और वहाँ ठीक से सोना चाहते थे।
 
Having said this, Agnidev, informed by the elephant, came out of Ashwattha and entered Shami. He wanted to sleep there properly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)