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mahabharat 13.87.26: हे देवताओं! यदि अग्निदेव के दर्शन करने की इच्छा हो और उनसे कोई काम हो तो वहाँ जाकर उनसे मिलो॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.87.26 
तस्य दर्शनमिष्टं वो यदि देवा विभावसो:।
तत्रैवमधिगच्छध्वं कार्यं वो यदि वह्निना॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! यदि अग्निदेव के दर्शन करने की इच्छा हो और उनसे कोई काम हो तो वहाँ जाकर उनसे मिलो॥ 26॥
 
O Gods! If you wish to see Agnidev and if you have any work to do with him, then go there and meet him.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)