श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.87.21 
परेण तपसा युक्ता: श्रीमन्तो लोकविश्रुता:।
लोकानन्वचरन् सिद्धा: सर्व एव भृगूत्तम॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भृगुश्रेष्ठ! सभी सिद्ध देवता महान तपस्वी, तेजस्वी और लोगों में प्रसिद्ध होकर समस्त लोकों में अग्निदेव को खोजते रहे॥21॥
 
Bhrigu Shrestha! All the siddha deities, having great penance, being brilliant and famous among the people, kept searching for Agnidev in all the worlds. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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