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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध
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श्लोक 19
श्लोक
13.87.19
एतद् वाक्यमुपश्रुत्य ततो देवा महात्मन:।
जग्मु: संसिद्धसंकल्पा: पर्येषन्तो विभावसुम्॥ १९॥
अनुवाद
महात्मा ब्रह्माजी का यह कथन सुनकर सिद्धि की इच्छा रखने वाले देवता अग्निदेव की खोज करने के लिए वहाँ से चले गए॥19॥
Hearing this statement of Mahatma Brahmaji, the gods who desired success went away from there to search for Agnidev. 19॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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