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mahabharat 13.87.18: तुम सब लोग शीघ्र ही तेजस्वरूप अग्निदेव की खोज करो। वे तुम्हारी मनोवांछित कामनाओं को पूर्ण करेंगे।   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.87.18 
अन्विष्यतां स तु क्षिप्रं तेजोराशिर्हुताशन:।
स वो मनोगतं कामं देव: सम्पादयिष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तुम सब लोग शीघ्र ही तेजस्वरूप अग्निदेव की खोज करो। वे तुम्हारी मनोवांछित कामनाओं को पूर्ण करेंगे।
 
All of you should quickly search for Agnidev who is the embodiment of brilliance. He will fulfill your desired wishes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)