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mahabharat 13.87.167: हे राजा युधिष्ठिर, इस प्रकार मैंने तुम्हें सोने की उत्पत्ति और उसके दान के लाभ के विषय में बताया है।   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 167
 
 
श्लोक  13.87.167 
एतत् ते सर्वमाख्यातं सुवर्णस्य महीपते।
प्रदानस्य फलं चैव जन्म चास्य युधिष्ठिर॥ १६७॥
 
 
अनुवाद
हे राजा युधिष्ठिर, इस प्रकार मैंने तुम्हें सोने की उत्पत्ति और उसके दान के लाभ के विषय में बताया है।
 
O King Yudhishthira, thus have I told you about the origin of gold and the benefits of donating it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)