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mahabharat 13.87.164: ब्रह्मन्! प्रजा के कल्याण की इच्छा से प्रेरित होकर तथा इन्द्र की आज्ञा से उन्होंने तारकासुर आदि दैत्यों का वध किया ॥164॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 164
 
 
श्लोक  13.87.164 
जघान तारकं चापि दैत्यमन्यांस्तथासुरान्।
त्रिदशेन्द्राज्ञया ब्रह्मँल्लोकानां हितकाम्यया॥ १६४॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! प्रजा के कल्याण की इच्छा से प्रेरित होकर तथा इन्द्र की आज्ञा से उन्होंने तारकासुर आदि दैत्यों का वध किया ॥164॥
 
Brahman! Inspired by his desire for the welfare of the people and the orders of Lord Indra, he killed Tarakasura and other demons. 164॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)