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श्लोक  13.87.162 
एषा सुवर्णस्योत्पत्ति: कथिता ते मयानघ।
कार्तिकेयस्य च विभो तद् विद्धि भृगुनन्दन॥ १६२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हे निष्पाप भृगुनंदन! मैंने तुम्हें स्वर्ण और कार्तिकेय की उत्पत्ति बताई है। इसे अच्छी तरह समझ लो। 162.
 
Lord! O sinless Bhrigu Nandan! I have told you the origin of gold and Kartikeya. Understand this well. 162.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)