Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.157: वह इन्द्रसहित समस्त रक्षकों के लोकों में शुभ सम्मान पाता है और इस लोक में यशस्वी एवं निष्पाप होकर आनन्द प्राप्त करता है ॥157॥ | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह इन्द्रसहित समस्त रक्षकों के लोकों में शुभ सम्मान पाता है और इस लोक में यशस्वी एवं निष्पाप होकर आनन्द प्राप्त करता है ॥157॥
He gets auspicious respect in the worlds of all the guardians including Indra. At the same time, he enjoys being successful and sinless in this world. 157॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥