Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.155: जो सूर्योदय के समय स्वर्ण दान करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जो मध्याह्न के समय स्वर्ण दान करता है, उसके सभी भविष्य के पाप नष्ट हो जाते हैं ॥155॥ | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो सूर्योदय के समय स्वर्ण दान करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जो मध्याह्न के समय स्वर्ण दान करता है, उसके सभी भविष्य के पाप नष्ट हो जाते हैं ॥155॥
One who donates gold at sunrise, all his sins are washed away, and one who donates gold at noon, destroys all his future sins. ॥155॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥