Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.87.152: अतः हमने सुना है कि जो धर्मात्मा पुरुष सुवर्ण का दान करते हैं, वे सब देवताओं को भी ऐसा ही करते हैं ॥152॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  13.87.152 
तस्माद् ये वै प्रयच्छन्ति सुवर्णं धर्मदर्शिन:।
देवतास्ते प्रयच्छन्ति समस्ता इति न: श्रुतम्॥ १५२॥
 
 
अनुवाद
अतः हमने सुना है कि जो धर्मात्मा पुरुष सुवर्ण का दान करते हैं, वे सब देवताओं को भी ऐसा ही करते हैं ॥152॥
 
Therefore, we have heard that those righteous men who donate gold, do so to all the gods. ॥ 152॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)