| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध » श्लोक 147 |
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| | | | श्लोक 13.87.147  | अग्निर्ब्रह्मा पशुपति: शर्वो रुद्र: प्रजापति:।
अग्नेरपत्यमेतद् वै सुवर्णमिति धारणा॥ १४७॥ | | | | | | अनुवाद | | अग्नि ब्रह्मा, पशुपति, शर्व, रुद्र और प्रजापति का स्वरूप है। सभी लोग मानते हैं कि यह स्वर्ण अग्नि की संतान है। 147. | | | | Agni is the form of Brahma, Pashupati, Sharva, Rudra and Prajapati. Everyone believes that this gold is the child of Agni. 147. | | ✨ ai-generated | | |
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