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mahabharat 13.87.142: हे प्रभु! पितामह! ये सब और हम सब आपकी ही संतान हैं; क्योंकि आप देवताओं और ब्राह्मणों के रचयिता हैं॥142॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  13.87.142 
सर्वे हि वयमेते च तवैव प्रसव: प्रभो।
देवानां ब्राह्मणानां च त्वं हि कर्ता पितामह॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! पितामह! ये सब और हम सब आपकी ही संतान हैं; क्योंकि आप देवताओं और ब्राह्मणों के रचयिता हैं॥142॥
 
‘Lord! Grandfather! All these and we are your children; because you are the creator of the gods and the brahmins.॥ 142॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)