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mahabharat 13.87.14: तुम लोग अग्निदेव की खोज करो और उन्हें आज ही इस कार्य के लिए नियुक्त करो। हे भोले देवताओं! मैंने तुम्हें तारकासुर को मारने का यह उपाय बताया है।   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.87.14 
अन्विष्यतां वै ज्वलनस्तथा चाद्य नियुज्यताम्।
तारकस्य वधोपाय: कथितो वै मयानघा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तुम लोग अग्निदेव की खोज करो और उन्हें आज ही इस कार्य के लिए नियुक्त करो। हे भोले देवताओं! मैंने तुम्हें तारकासुर को मारने का यह उपाय बताया है।
 
You all should search for Agnidev and appoint him for this task today itself. O innocent gods! I have told you this method to kill Tarakasur.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)