Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.137: अग्निदेव ने अग्निदेव को वरुण के रूप में शिव से पुत्र रूप में अंगिरा को प्राप्त किया; इसलिए अंगिरा के वंश में उत्पन्न सभी पुत्र अग्निवंशी और वरुण भी कहलाते हैं। | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जग्राहांगिरसं देव: शिखी तस्माद्धुताशन:।
तस्मादांगिरसा ज्ञेया: सर्व एव तदन्वया:॥ १३७॥
अनुवाद
अग्निदेव ने अग्निदेव को वरुण के रूप में शिव से पुत्र रूप में अंगिरा को प्राप्त किया; इसलिए अंगिरा के वंश में उत्पन्न सभी पुत्र अग्निवंशी और वरुण भी कहलाते हैं।
The Agni Deva (fire-god) adorned with flames received Angira as his son from Shiva in the form of Varuna; hence all the sons born in Angira's lineage are also known as Agnivanshi and Varuna. 137.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥