श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  13.87.134 
अष्टौ कविसुता ह्येते सर्वमेभिर्जगत‍् ततम्।
प्रजापतय एते हि प्रजाभागैरिह प्रजा:॥ १३४॥
 
 
अनुवाद
ये आठों कवि के पुत्र हैं। यह सम्पूर्ण जगत् इनसे व्याप्त है। ये आठों प्रजापति हैं और प्रजा के गुणों से युक्त होने के कारण इन्हें प्रजा भी कहते हैं॥134॥
 
These eight are the sons of the poet. This entire universe is pervaded by all of them. These eight are Prajapatis and are also called Prajas because they have the qualities of the Prajas.॥ 134॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd