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mahabharat 13.87.133: उनके नाम हैं- कवि, काव्य, धृष्णु, बुद्धिमान शुक्राचार्य, भृगु, विरजा, काशी और धर्मात्मा उग्र। 133॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  13.87.133 
कवि: काव्यश्च धृष्णुश्च बुद्धिमानूशना तथा।
भृगुश्च विरजाश्चैव काशी चोग्रश्च धर्मवित्॥ १३३॥
 
 
अनुवाद
उनके नाम हैं- कवि, काव्य, धृष्णु, बुद्धिमान शुक्राचार्य, भृगु, विरजा, काशी और धर्मात्मा उग्र। 133॥
 
Their names are - Kavi, Kavya, Dhrishnu, intelligent Shukracharya, Bhrigu, Virja, Kashi and religious man Ugra. 133॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)